लिख तू ए दिल कुछ ऐसा सुर्ख़ियो बन अख़बार में आ जाएगा ।।
चोर उच्चकों की करो क़दर क्या पता कोई कब सरकार में आ जाएगा ।।
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जान पहचान
जरूरी तो नही कि हर चाहत का मतलब इश्क हो ।
कभी कभी अनजान रिश्तो के लिये भी दिल बेचैन हो जाता है।।
आँधी
आँधी के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का ।
कैसे तिनका-तिनका कर बना था धोंसला ये तूफ़ान क्या जाने ।।
खामोशी और सन्नाटा
ख़ामोशी ग़र गुनगुना उठे,नज़र नज़र शोर हो जाये।
सन्नाटा कभी हद से गुज़रे,दर्दे दिल आम हो जाये ।।
मोड़
ख़्वाहिशाें का मोहल्ला बहुत बड़ा होता है ।
बेहतर है कि हम ज़रूरतों की गली में ही मुढ जांए ।।
मेहमान नवाज़
लौटना कभी हमारे शहर
तो मिल के जाना ।
हम आज भी सूरज ढलने
तक दरवाजे खुला रखते है ।।
सफ़र की शुरुआत
स्वागतम !
साथ अच्छा हो तो सफ़र का मज़ा ही अलग!!
