ख़्वाहिशाें का मोहल्ला बहुत बड़ा होता है ।
बेहतर है कि हम ज़रूरतों की गली में ही मुढ जांए ।।
मेहमान नवाज़
लौटना कभी हमारे शहर
तो मिल के जाना ।
हम आज भी सूरज ढलने
तक दरवाजे खुला रखते है ।।
सफ़र की शुरुआत
स्वागतम !
साथ अच्छा हो तो सफ़र का मज़ा ही अलग!!
